1 May 2016

अक्षय तृतीया जो इस वर्ष 9May को है उसका महत्व क्यों है जानिए कुछ महत्वपुर्ण जानकारी

अक्षय तृतीया जो इस वर्ष 9May को है उसका महत्व क्यों है जानिए कुछ महत्वपुर्ण जानकारी
- आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।
-महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।
-माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था
-द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।
- कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।
- कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।

।। सत्संग ।।


।। सत्संग ।।
सत्संग का अर्थ क्या है.?
संतजन कहते है की:- "सत्संग" अर्थात सत् तत्वो का संग, सज्जनो का संग, सद्गुणो का संग, सद ग्रन्थों का संग,सद्विचारों का संग, सत् कर्मो का संग,सदपठन का संग, सदचिंतन का संग, सद श्रवण का संग। ऐसे अनेक सत् तत्व है, प्रत्येक सत्तत्व साक्षात श्रीकृष्ण का स्वरुप है। जिसका संग करने से काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर जैसे दूर्गुणों से छुटकारा मिले। जिसका संग करने से अहंता-ममता छुट जाये तथा दीनता प्राप्त हो। जिसका संग करने से गौरव पूर्ण वैष्णवी जीवन जीने मे सफलता मिले। जिसका संग स्वधर्म का आचरण करने की प्रेरणा दे, तथा जिसका संग करने से, प्रभु के स्वरुप मे प्रेम जाग्रत हो,उसका संग ही सत्संग है। संक्षिप्त मे कहा जाय तो जो संग जीवात्मा को परमात्मा की और ले जाए उसका नाम ही "सत्संग" है।
              

सनातन परम्परा के १६ संस्कार

सनातन परम्परा के १६ संस्कार ...

सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस्कारों का महती योगदान है।